मीठी जुबान वाली बिल्ली


 लेखक : राकेश कुमार          अध्यापक  

                             मीठी जुबान वाली बिल्ली 

बहुत समय पहले की बात है। एक विशाल और सुंदर जंगल में एक न्यायप्रिय शेर राजा राज करता था। 

एक दिन शेर दूसरे जंगल में शिकार के लिए चला गया। मेरी मुख्य वेबसाइट पर जाने के लिए क्लिक करें 

उसी जंगल में एक चालाक बिल्ली रहती थी। उसने वर्षों तक जंगल के तौर-तरीके सीख रखे थे। वह जानती थी किससे कैसे बात करनी है, किसे क्या सुनना अच्छा लगेगा। उसका मन बहुत काला था, पर उसकी जुबान शहद से भी मीठी थी।

उसके मन में एक ही सपना पल रहा था—

“काश राजा कभी लौटकर न आए… और इस जंगल की रानी मैं बन जाऊँ!”

राजा के जाते ही बिल्ली सक्रिय हो गई। वह हर जानवर के पास जाकर मीठी-मीठी बातें करती—

“आप जैसा बलवान तो पूरे जंगल में कोई नहीं!”

“आपकी बुद्धि तो राजा से भी तेज है!”

जानवर उसकी बातों में आने लगे। उसे लगा कि अब जंगल में उसका प्रभाव बढ़ रहा था ।

जब भी दो जानवरों में झगड़ा होता, बिल्ली तुरंत वहाँ पहुँच जाती। बाहर से वह शांति का दिखावा करती—

“अरे भाई, लड़ाई से क्या मिलेगा? प्रेम से रहो…अंदर से खुश होती रहती ” भीतर ही भीतर सोचती—

“देखती हूँ किसका पलड़ा भारी है, मैं उसी का साथ दूँगी।” बिल्ली  हमेशा उसी ओर खड़ी हो जाती जहाँ उसे अपना फायदा दिखता अगर फायदा न भी दिखे तो खुद को हमेशा महान बनाए रखने में लगी रहती और खुश होती रहती । कभी इधर की बात उधर पहुँचा देती, कभी उधर की बात इधर। धीरे-धीरे जंगल में अविश्वास और मतभेद बढ़ने लगे।

जंगल में दो बंदर रहते थे—बहुत समझदार और चौकन्ने। उन्होंने कई बार बिल्ली को भड़काने वाली बातें करते सुना जंगल के दूसरे जानवर भी बिल्ली को  समझने लगे थे । वे समझ गए कि बिल्ली का मकसद शांति नहीं, सत्ता है।

एक दिन  बंदरों ने  बिल्ली की   सच्चाई सामने लाने की योजना बनाई। दोनों ने जानबूझकर झगड़े का नाटक किया। बिल्ली दौड़ी-दौड़ी आई। पहले उसने एक बंदर की तरफदारी की। लेकिन जैसे ही उसे लगा कि दूसरा बंदर ज्यादा ताकतवर है, वह तुरंत पलट गई।

दोनों बंदर हँस पड़े। और बिल्ली की चालाकी का पर्दाफाश हो गया ।

उसी समय शेर राजा भी शिकार से लौट आया। उसने सबकी बातें सुनीं और सच्चाई जान ली।

राजा ने गरजते हुए कहा—

“जो अपने स्वार्थ के लिए मित्रों में फूट डाले, वह इस जंगल में रहने योग्य नहीं!”

यह सुनते ही बिल्ली डर गई और जान बचाकर भागने लगी। भागते-भागते वह जंगल के बाहर पहुँची, जहाँ बंदरों ने पहले ही जाल बिछा रखा था। अपनी ही जल्दबाज़ी और लालच में वह जाल में फँस गई।

उस दिन उसकी मीठी जुबान उसे बचा न सकी।


स्वार्थ और चापलूसी से मीठी बातें करने वाले से सावधान 

✨ कहानी की सीख

मीठी बातें करने वाला हर व्यक्ति सच्चा नहीं होता



लेखक : राकेश कुमार          अध्यापक 

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